UPI अब फ्री नहीं? ICICI बैंक ने बढ़ाए बैलेंस नियम और लगाया ट्रांजेक्शन चार्ज-
ICICI बैंक इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। वजह है—ग्राहकों पर असर डालने वाले तीन बड़े फैसले और घटनाएं। पहला, मेट्रो शहरों के नए सेविंग्स अकाउंट धारकों के लिए न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस (MAB) को ₹50,000 तक बढ़ाना; दूसरा, कुछ परिस्थितियों में UPI लेन-देन पर शुल्क लगाना; और तीसरा, गुजरात सरकार का आदेश जिसमें SIM-swap साइबर फ्रॉड मामले में बैंक को ₹1.05 करोड़ का मुआवजा देने को कहा गया है। इन तीनों मुद्दों ने सोशल मीडिया से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक बहस छेड़ दी है।
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₹50,000 मिनिमम बैलेंस: ग्राहकों में नाराज़गी-
ICICI बैंक ने 1 अगस्त 2025 से मेट्रो शहरों में नए सेविंग्स अकाउंट के लिए MAB को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया है—यानि 400% की बढ़ोतरी।
- अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह सीमा ₹25,000 और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹10,000 तय की गई है।
- पुराने ग्राहकों के खातों पर फिलहाल यह बदलाव लागू नहीं होगा, लेकिन नए खाते खोलने वालों को तुरंत इसका पालन करना होगा।
सोशल मीडिया प्रतिक्रिया
कई यूज़र्स ने इस फैसले को “elitist” करार दिया। NDTV और LiveMint की रिपोर्ट्स में लोगों ने सवाल उठाया—”जब देश में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं, तब ₹50,000 का बैलेंस कैसे संभव है?”
UPI ट्रांजेक्शन पर शुल्क: मुफ्त डिजिटल पेमेंट पर सवाल-
UPI को भारत में अब तक “फ्री” और “इंस्टेंट” भुगतान के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन ICICI बैंक ने 1 अगस्त 2025 से पेमेंट Aggregators (PA) पर शुल्क लगाना शुरू किया है।
- जिन Aggregators के पास बैंक में एस्क्रो अकाउंट नहीं है, उन पर ₹0.04 प्रति ₹100 (अधिकतम ₹10) का शुल्क लगेगा।
- एस्क्रो अकाउंट वाले Aggregators पर यह शुल्क ₹0.02 प्रति ₹100 (अधिकतम ₹6) होगा।
बाज़ार पर असर
यह कदम सीधे-सीधे ग्राहकों के लिए नहीं है, लेकिन डिजिटल पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म्स पर इसका असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में UPI के मुफ्त मॉडल पर खतरा मंडरा सकता है।
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3️ SIM-swap साइबर फ्रॉड: ₹1.05 करोड़ मुआवजा-
गुजरात सरकार के Adjudicating Officer ने ICICI बैंक को एक अहम SIM-swap साइबर फ्रॉड मामले में ₹1.05 करोड़ मुआवजा और ₹10 लाख का जुर्माना देने का आदेश दिया है।
- मामला: मार्च 2023 में अहमदाबाद की एक कंपनी—Collective Trade Links Pvt Ltd—के खाते से 4 घंटे के अंदर 22 फर्जी लेन-देन कर ₹1.19 करोड़ निकाल लिए गए।
- जांच में खुलासा: बैंक ने लाभार्थी जोड़ने और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन्स को वेरिफाई करने में गंभीर लापरवाही बरती।
- परिणाम: यह फैसला डिजिटल सुरक्षा में बैंक की जिम्मेदारी तय करने वाला अहम उदाहरण बन गया है।
तीनों मुद्दों का सारांश
मामला क्या हुआ असर न्यूनतम बैलेंस वृद्धि MAB ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 (मेट्रो में नए खाते) नए ग्राहकों पर आर्थिक दबाव UPI शुल्क पेमेंट Aggregators पर ट्रांजेक्शन फीस डिजिटल पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म की लागत बढ़ी साइबर फ्रॉड मुआवजा ₹1.05 करोड़ मुआवजा + ₹10 लाख जुर्माना बैंक की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल विश्लेषण-
बैंक का कहना है कि MAB वृद्धि का उद्देश्य प्रीमियम सेवाओं के लिए पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना है। वहीं, UPI चार्ज को लेकर ICICI का तर्क है कि यह केवल पेमेंट Aggregators पर लागू है, ग्राहकों पर नहीं। लेकिन सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि इन फैसलों ने बैंक की छवि पर असर डाला है।
साइबर फ्रॉड का मामला बैंकिंग सेक्टर के लिए एक चेतावनी है—डिजिटल सेवाओं में सुरक्षा और कस्टमर वेरिफिकेशन को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस अपनाना ज़रूरी है।Oppo K13 Turbo Pro 5G: इस फोन में है इन-बिल्ट फैन! Poco F7 भी रह जाएगा पीछे
निष्कर्ष-
ICICI बैंक के हालिया कदम और घटनाएं बताती हैं कि बैंकिंग सेक्टर में बदलाव लगातार हो रहे हैं—कभी आर्थिक मॉडल बदलने के लिए, तो कभी सुरक्षा मजबूती के लिए। लेकिन ऐसे फैसलों का असर सीधे ग्राहकों और उनकी धारणा पर पड़ता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक इन विवादों के बीच अपनी छवि और ग्राहक आधार कैसे बनाए रखता है।